अटूट विश्वास की कहानी
बहुत समय पहले एक पहाड़ी गाँव में मोहन नाम का एक युवक रहता था। वह बहुत गरीब था और जंगल से लकड़ी काटकर बेचकर अपना जीवन चलाता था। उसके माता-पिता नहीं थे, लेकिन उसके पास एक चीज़ थी — भगवान पर अटूट विश्वास। हर सुबह वह काम पर जाने से पहले एक छोटे से मंदिर में जाता और प्रार्थना करता — “हे प्रभु, आज का दिन अच्छा बनाना।” एक दिन जंगल में लकड़ी काटते समय उसका पैर फिसल गया और उसकी कुल्हाड़ी नदी में गिर गई। कुल्हाड़ी ही उसकी रोज़ी-रोटी का एकमात्र साधन थी। वह नदी किनारे बैठकर रोने लगा और भगवान को याद करने लगा। थोड़ी देर बाद एक बूढ़ा साधु वहाँ आया और बोला, “बेटा, क्यों रो रहे हो?” मोहन ने सारी बात बता दी। साधु ने आँखें बंद कीं और नदी में हाथ डाला। पहले उन्होंने सोने की कुल्हाड़ी निकाली और पूछा — “क्या यह तुम्हारी है?” मोहन ने कहा — “नहीं, मेरी तो लोहे की थी।” फिर साधु ने चाँदी की कुल्हाड़ी निकाली। मोहन ने फिर मना कर दिया। आख़िर में साधु ने लोहे की कुल्हाड़ी निकाली। मोहन खुश होकर बोला — “हाँ, यही मेरी है!” साधु मुस्कुराए और बोले — “तुम ईमानदार हो, इसलिए यह तीनों कुल्हाड़ियाँ तुम्हारी हैं।” यह कहक...