विश्वास की शक्ति

 एक छोटे से गाँव में एक बूढ़ी माँ रहती थी। वह बहुत गरीब थी, लेकिन भगवान पर उसका अटूट विश्वास था। हर सुबह वह मंदिर जाकर दीपक जलाती और कहती — “हे प्रभु, मेरे पास देने को कुछ नहीं, बस मेरा विश्वास ही मेरी सबसे बड़ी पूजा है।”

एक दिन गाँव में भयंकर सूखा पड़ गया। लोगों के पास खाने तक का अनाज नहीं बचा। बूढ़ी माँ के घर में भी बस थोड़ा सा आटा बचा था। उसने सोचा कि अगर वह यह भी बाँट देगी तो कल क्या खाएगी? लेकिन फिर उसे भगवान पर भरोसा याद आया।

उसने आधा आटा एक भूखे यात्री को दे दिया और मन ही मन प्रार्थना की। अगले दिन जब वह उठी, तो उसके दरवाज़े पर अनाज की एक बोरी रखी हुई थी। कोई नहीं जानता था कि वह किसने रखी, लेकिन बूढ़ी माँ समझ गई — यह भगवान की कृपा है।

उस दिन से पूरे गाँव को समझ आ गया कि सच्ची भक्ति और विश्वास कभी व्यर्थ नहीं जाते।

सीख:

सच्चे मन से की गई प्रार्थना और दूसरों की मदद करना ही सबसे बड़ी भक्ति है।

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